Saturday, March 26, 2011

हम हिंद के लोग भी अजीब होते हैं!


हम हिंद के लोग भी अजीब होते हैं!
दूरियां हमें बाँटती नहीं, दूरियों से हम और करीब होते हैं!!
तमाम मुश्किलों के बाद भी हम निरंतर बढ़ रहे हैं, ये क्या कम है!
नेताओं और बाबुओं में भी, कुछ लोग काम के मुरीद होते हैं!!
जय विज्ञान के देश में, चाँद पर पहुँच कर भी लोग नहीं बदले यहाँ!
मांगों में सिन्दूर हैं आज भी, पूजने से पत्थर भी सजीव होते हैं!!
अरे अक्ल के अंधे हुक्मरानों, अनेक गोधरा और गुजरात के वावजूद भी यहाँ!
चाय की चुस्कियों पर रोज सुबह, नुक्कड़ पे रघु, फ्रांसिस, सतनाम और फरीद होते हैं!!
हम हिंद के लोग भी अजीब होते हैं... हम हिंद के लोग भी अजीब होते हैं...

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