Saturday, March 26, 2011

वो मुस्कुराना तेरा!


आज भी याद आता है मुझे, इक हसीं चेहरा,
गली के मोड पर, अक्सर टकराती थी राहें,
नज़रें बचा कर वो देखना तेरा!

इधर-उधर ढूंढकर, मिलती थी जब मेरी नज़र,
दो निगाहों की गुफ्तगू और इनका मिलन,
वो निगाहें मिलते ही,
नज़रे झुकाकर मुस्कुराना तेरा!
बहुत याद आती हैं, वो मुस्कुराना तेरा!

हम तो समझे थे वो प्यार था तेरा,
उफ़! ये हया थी, के अंदाज कातिलाना तेरा!

तुम दिखी उस दिन,
बाजार में अपने अब्बा के साथ,
सर उठाया तक नहीं,
न नजरें ही मिली,
दिल की बात दिल में ही तड़प कर रह गयी,
क्या खबर थी की,
है आखिरी मुलाक़ात ये,
हाय! उसके बाद न मिली तुम,
वो मिला आखिरी नजराना तेरा!

फिर सुना इक दिन,
किसी की दुल्हन बनकर,
अजनबी सी चल गयी,
मैं न था, रो पड़े थे राह के पत्थर सभी,
ये असर कर गयी दिलों पे,
उस गली से जाना तेरा!

कमबख्त! आज भी याद आता है,
नज़रे झुका कर वो मुस्कुराना तेरा!!

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