जिन्हें देख कर खुश हुआ करते थे,
हमें आज वो गमज़दा कर गए||
दो प्यार भरे बोल के बदले,
मेरे दामन को काँटों से भर गए||
हम सोचते थे जिन्हें कि वो मेरे हैं,
भरी महफ़िल में हमें वो तनहा कर गए||
तनहाइयों में हमसफ़र हुआ करते थे,
मजलिसे यार में अकेला कर गए||
साकी क्या तेरा शुक्रिया अदा करूँ,
गम के साथ, जामे मीना भी पिला गए||
अब क्या उनका गम करूँ मैं “आशिक”,
जाते-जाते आशिकी का नया अंदाज़ सिखा गए||
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