आज सब मशगुल हैं, मसरूफ हैं,
वक़्त कहाँ है, जो कोई करे मुझ नाचीज पर बर्बाद,
ऐसे में यूं ही अचानक, आज हमने कर लिया जो उनको याद,
उफ़, उस ज़ालिम से ना समझी गयी दिल की बात,
समझ बैठे वो की कोई मतलब हमारा है, जो कर रहें फ़रियाद,
क्या कोई यूँ ही पूछता है, आजकल किसी का हाल,
कमबख्त कहाँ से आ गया ये जल्लाद,
अरे ज़नाब हम कहाँ इस काबिल थे, की कोई कर लेता हमें भी याद,
ये दिल भूलता नहीं बीते दिन, अच्छे लोग और उनका साथ,
यूँ ही तनहाइयों में जब नहीं कुछ सूझता,
लोग जो दिल के करीब हैं, कर लेता हूँ उनको याद|
हाय उनकी याद....
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