Saturday, October 19, 2019

कह दो जमाने से

कोई हाल न पूछे मेरा, कह दो जमाने से,
हस्ती ही जब मिट गई, मिटा दो नाम भी फसाने से।

ज़िन्दगी क्या है, जब छूट गया घर-परिवार,
क्या मिला मुझको शहर जा चंद सिक्के कमाने से।

जिसे तुम प्यार करते हो, उसे प्यार नहीं करते,
मोह्हबत है ये या कोई दिल्लगी, कोई पूछे ज़रा दीवाने से।

रोज़ दौड़ता- भागता, ज़िन्दगी का बोझ लिये,
ज़िंदा लाश है, मरा नहीं अभी, क्या फायदा इसे दफनाने से।

दोस्तों की कमी नहीं, बस उनका ही सहारा है,
कुछ मैं तकल्लुफ़ पसंद, कुछ मसगूल-ओ-मगरूर आजमाने से।

- आनंद (२०/१०/२०१९)

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