Collection of my thoughts... weird, most of the time... different aspects of life... on different subject, which interests me... weird, once again... :)
Saturday, February 6, 2021
मैं बुद्धिजीवी हूँ
Friday, February 5, 2021
चलो आज बसंत की बात करते हैं
चलो आज बसंत की बात करते हैं,
तुम्हारे पसंद की बात करते हैं।
नव वर्ष, नूतन हर्ष, नया सब कलेवर है,
नई धरा, आकाश नया, नित नव अवसर है,
पीली सरसों है सब ओर,
नव किरणों से सराबोर,
पंछी चहके गाते गीत,
प्रेमी ढूंढें बिछड़े मीत,
कितनी अच्छी हैं ये बातें,
सोचो, बिन बसंत हम कर पाते?
प्रकृति-चक्र के साथ करते हैं,
चलो, फिर आज बसंत की बात करते हैं,
तुम्हारे पसंद की बात करते हैं।
मुझ में आ के मिल जाती है,
गुड़ सी मीठी घुल जाती है,
कल-कल नदिया बहती जाती,
कली-कली फूलों पे मंडराती,
जीवन भ्रमर फिर इठलाती है,
इसके बिन क्या हम मनुष्य रह पाते?
नव स्फूर्ति नव 'आनंद' की बात करते हैं,
चलो, फिर आज बसंत की बात करते हैं,
तुम्हारे पसंद की बात करते हैं।
~ आनंद ०५/०२/२०२१