कोई तो ऐसा भी होगा, जो मुझको चाहेगा||
न जाने कौन है वो, जिससे प्यार है मुझको,
बहुत दिनों से बड़ा, इंतज़ार है मुझको,
मैं लिख रहा हूँ रिशालों में गीत अरसो से,
लिखीं है जो किसी, गुमनाम महज़बीं के नाम,
किसी कि शर्म् गी, आँखों में रंग भर देंगी,
दबी जबानों से इज़हार ऐ इस्क कर देंगे|
हर एक शहर में जा के सवाल करता हूँ,
हरेक मोड से इस, सोच में गुजरता हूँ,
कोई कलम को मेरे प्यार कि अदा देदे,
ये मेरी सोहरतें ले के, मुझे वफ़ा देदे,
मेरी कहानी का उन्बान बनके आये कोई,
कभी तो रूह का सामान बनके आये कोई|
मैं सोचता हूँ कि इतनी बड़ी है ये दुनिया,
कोई तो ऐसा भी होगा, जो मुझको चाहेगा||